Shimla Toy Train शिमला की लोकल टॉय ट्रेन यात्रा: पुष्पा और प्रगति का यादगार सफर
हिमाचल प्रदेश की सुरम्य घाटियों में बसा शिमला, अपनी उपनिवेश कालीन विरासत और ठंडी हवा के साथ-साथ अपने Shimla Toy Train Trip (लोकल टॉय ट्रेन ट्रिप) के लिए भी मशहूर है। हाल ही में, पुष्पा और प्रगति अपने बहनोई (बहन के बेटे) के साथ इस अविस्मरणीय यात्रा पर निकलीं, जो न केवल प्रकृति की खूबसूरती से भरपूर थी, बल्कि परिवार के साथ बिताए खूबसूरत पलों से भी भरी हुई थी।
Toy Train Shimla : यह यात्रा क्यों खास थी?
यह सिर्फ एक ट्रेन यात्रा नहीं थी, बल्कि परिवार के बंधन, प्रकृति की गोद और हिमाचल की संस्कृति का अनोखा संगम था!
क्यों शिमला और टॉय ट्रेन?
शिमला की ऐतिहासिक सुंदरता को हिमालय के दिल में चलने वाली एक संकरी लोकल टॉय ट्रेन और भी खास बना देती है। यह ट्रेन एक विश्व धरोहर स्थल भी है, जो अपने इंजीनियरिंग चमत्कार और खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के लिए जानी जाती है।
पुष्पा और प्रगति के लिए यह मौका था कि वे अपने 8 साल के छोटे रिश्तेदार को हिमाचल की प्राचीन और सजीव संस्कृति से परिचित कराएं। बच्चे की उत्सुकता और सवालों ने इस यात्रा को और भी रोचक बना दिया।
Toy Train Shimla ki यात्रा की योजना बनाना
टॉय ट्रेन की समय सारणी और मौसम का ध्यान रखते हुए उन्होंने अपनी यात्रा की योजना बनाई। वसंत के मौसम या शरद ऋतु में यात्रा करना सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि यह मौसम सुखद होता है।
- टिकट बुकिंग: IRCTC वेबसाइट या शिमला स्टेशन से 30 दिन पहले बुक करें
- सबसे अच्छा समय: सुबह 10:30 बजे या दोपहर 2:30 बजे की ट्रेन
- पैकिंग: गर्म कपड़े, रेनकोट, स्नैक्स और पानी जरूर रखें ।

यात्रा की शुरुआत: ट्रेन में सफर
शिमला रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की आवाज़ के साथ उत्साह बढ़ गया। विंटेज इंजन की चचच्… चचच्… आवाज़ ने सभी को बचपन की यादें ताजा कर दीं।
ट्रेन धीरे-धीरे घाटियों से होकर गुजरी, जहाँ सेब के बगीचे, घर और खेत दिखे। ट्रेन की खिड़की से पास के पेड़, नदियाँ, और पर्वतीय दृश्य साफ दिख रहे थे। बच्चे ने उत्सुकता से आस-पास के हर दृश्य पर सवाल किए।
रास्ते के स्टेशन और गांव
ट्रेन रास्ते में कई छोटे-छोटे स्टेशन जैसे बरोग, सोलन, और कंडाघाट से गुजरती है। हर स्टेशन पर परिवार थोड़ा ठहरा, ताजी चाय और स्थानीय फल खरीदकर स्थानीय लोगों से बात की।
- बरोग स्टेशन: सबसे लंबी रेलवे सुरंग (1142 मीटर)
- सोलन: सेब और आलू की उपजाऊ घाटी
- कंडाघाट: हरे-भरे जंगल और झरने
खाने-पीने का अनुभव
यात्रा के दौरान उन्होंने अपने साथ हल्के स्नैक्स लाए थे, लेकिन रास्ते में भुनी मकई और ताज़े सेब का लुत्फ़ उठाना न भूले। सोलन में मिठ्ठा नाम की पारंपरिक मिठाई भी चखी जो गुड़ और सूखे मेवों से बनी होती है।
सुरम्य दृश्य और यादगार पल
जैसे-जैसे ट्रेन ऊपर चढ़ती गई, हिमालय की चोटियाँ और हरे-भरे जंगल दूर-दूर तक दिखाई दिए। बच्चे ने स्थानीय परंपराओं और त्योहारों के बारे में भी जाना।
यात्रा की सबसे खूबसूरत बात: जब ट्रेन लूप लाइन से गुजरती है और पहाड़ के चारों ओर घूमती है!
टॉय ट्रेन का इतिहास
पुष्पा ने बताया कि यह रेलवे लाइन ब्रिटिश काल (1898-1903) में कठिन पहाड़ी इलाके को पार कर बनाई गई थी। यह सफर सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ने का माध्यम भी है।

परिवार के लिए उपयोगी सुझाव
- टिकट: जल्द बुक करें, खासकर छुट्टियों में (₹100-₹500)
- समय: सुबह या शाम के वक्त यात्रा करें (बेहतर रोशनी)
- कपड़े: गर्म जैकेट, टोपी और दस्ताने जरूरी
- स्नैक्स: पानी, बिस्किट, फल साथ रखें
- कैमरा: फोन पूरी तरह चार्ज करें
- सीट: बाईं तरफ की खिड़की बेहतर दृश्य देती है
यात्रा के बाद शिमला दर्शन
ट्रेन यात्रा के बाद परिवार ने मॉल रोड, रिज, क्राइस्ट चर्च और स्थानीय बाजार का भी आनंद लिया। हिमाचली व्यंजन के लिए अशियाना रेस्टोरेंट जरूर जाएं।
अंतिम विचार about Shimla Toy Train
शिमला की लोकल टॉय ट्रेन यात्रा एक सुंदर मिश्रण है पुरानी यादों, प्रकृति की खूबसूरती और हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत का। पुष्पा, प्रगति और उनके बहनोई की यह यात्रा बताती है कि कैसे परिवार के साथ बीता हर पल खुशियों से भरा हो सकता है।
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