सांगला होली और कामरू होली 2026 | किनौर की पारंपरिक होली का सम्पूर्ण यात्रा गाइड
जब भारत के अधिकतर हिस्सों में होली रंगों, पानी और डीजे तक सीमित होती है, तब हिमाचल प्रदेश के किनौर जिले में होली आज भी देव संस्कृति, लोक परंपरा और सामूहिक जीवन का पर्व है।

किनौर की सांगला होली और कामरू होली (Sangla Kamru Holi) न केवल देखने में अलग हैं, बल्कि इनका उद्देश्य भी अलग है। यहां होली का अर्थ है – देवताओं को प्रसन्न करना, गांव को एक सूत्र में बांधना और प्रकृति के साथ उत्सव मनाना।
किनौर में होली की परंपरा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
किनौर की होली को स्थानीय भाषा में फाग या फागुली कहा जाता है। इसकी परंपरा बुशहर रियासत के समय से चली आ रही है। उस समय गांव-गांव में देवताओं के माध्यम से सामाजिक नियम, मेल-मिलाप और न्याय व्यवस्था चलती थी।
होली के अवसर पर देवताओं की विशेष पूजा होती है, जिसे साल की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक गतिविधियों में गिना जाता है। यही कारण है कि यहां होली केवल त्योहार नहीं बल्कि एक धार्मिक अनुष्ठान है।

Sangla Holi 2026 : रंग, नृत्य और सामूहिक उत्सव
सांगला होली किनौर की सबसे प्रसिद्ध और भव्य होली मानी जाती है। इसका केंद्र बेरी नाग देवता हैं, जिन्हें पूरे क्षेत्र का रक्षक माना जाता है।
चार दिन तक चलने वाले इस उत्सव में:
- देवता की पालकी यात्रा
- लोक नृत्य और नाट्य मंचन
- ढोल, नगाड़े और करनाल वाद्य
- गुलाल और प्राकृतिक रंग
- सामूहिक भोज
यह होली युवाओं, फोटोग्राफरों और सांस्कृतिक यात्रियों के लिए बेहद आकर्षक होती है।
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Kamru Holi 2026: आस्था, शांति और देव परंपरा
कामरू होली का स्वरूप सांगला से बिल्कुल अलग है। यहां उत्सव का केंद्र है कामरू किला और बद्रीनाथ (स्थानीय देवता)।
यहां होली में:
- तेज संगीत नहीं होता
- रंगों का प्रयोग बहुत सीमित होता है
- फूलों और अक्षत से होली
- पूजा और देव संवाद प्रमुख
यह होली उन लोगों के लिए आदर्श है जो हिमालय की आध्यात्मिक संस्कृति को करीब से महसूस करना चाहते हैं।
सांगला vs कामरू होली: विस्तृत तुलना तालिका
बिंदु सांगला होली कामरू होली प्रमुख देवता बेरी नाग बद्रीनाथ देव अवधि 4 दिन 1–3 दिन उत्सव का स्वरूप उत्साहपूर्ण शांत और धार्मिक रंगों का प्रयोग अधिक बहुत कम पर्यटक उपयुक्तता उच्च मध्यम
3 दिन का परफेक्ट यात्रा कार्यक्रम (Sangla & Kamru Holi Itinerary)
दिन 1: शिमला → सांगला
- शिमला – रामपुर – रिकांग पिओ – सांगला
- सतलुज और बस्पा घाटी के दृश्य
- सांगला बाजार भ्रमण
दिन 2: सांगला होली अनुभव
- बेरी नाग मंदिर दर्शन
- होली जुलूस और नृत्य
- स्थानीय भोजन और सांस्कृतिक रात
दिन 3: कामरू गांव
- कामरू किला और मंदिर दर्शन
- कामरू होली अनुष्ठान
- शांत गांव जीवन अनुभव
सांगला–कामरू के पास घूमने की जगहें
- चिटकुल: भारत का अंतिम गांव
- राकछम: प्राकृतिक सुंदरता
- रिकांग पिओ: किन्नर कैलाश
- कल्पा: सेब बागान
दोनों जगहों के अनोखे अनुभव
सांगला
- रंग और बर्फ का संगम
- नाइट फेस्टिवल
- युवा ऊर्जा
कामरू
- देव पालकी यात्रा
- प्राचीन किला
- आध्यात्मिक शांति
Sangla Kamru Holi देखने पहली बार आने वालों के लिए ज़रूरी ट्रैवल टिप्स
- मार्च में ठंड रहती है – ऊनी कपड़े जरूरी
- स्थानीय देव नियमों का सम्मान करें
- शराब और धूम्रपान से बचें
- कैश साथ रखें
- नेटवर्क सीमित होता है

FAQ on SANGLA HOLI and KAMRU HOLI अक्सर पूछे जाने वाले सवाल – सांगला होली और कामरू होली
1. सांगला होली 2026 कब मनाई जाएगी?
सांगला होली 2026 में हिमाचल प्रदेश के किनौर जिले के सांगला गांव में मार्च के अंतिम सप्ताह में फाल्गुन पूर्णिमा के आसपास मनाई जाएगी, हालांकि इसकी अंतिम तारीख स्थानीय देव परंपराओं के अनुसार तय होती है।
2. कामरू होली कितने दिनों तक चलती है?
कामरू होली आमतौर पर एक से तीन दिनों तक चलती है और यह सांगला होली के बाद कामरू गांव में धार्मिक अनुष्ठानों और देव पूजा के साथ मनाई जाती है।
3. क्या पर्यटक सांगला होली में भाग ले सकते हैं?
हां, पर्यटक सांगला होली में भाग ले सकते हैं, लेकिन उन्हें स्थानीय लोगों की भावनाओं, मंदिर नियमों और पारंपरिक मर्यादाओं का सम्मान करना जरूरी होता है।
4. क्या कामरू होली पर्यटकों के लिए उपयुक्त है?
कामरू होली उन पर्यटकों के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है जो धार्मिक, शांत और सांस्कृतिक अनुभव की तलाश में होते हैं।
5. सांगला होली और कामरू होली में मुख्य अंतर क्या है?
सांगला होली रंगों, ढोल-नगाड़ों और बड़े उत्सव के लिए जानी जाती है, जबकि कामरू होली अधिक शांत, धार्मिक और देव केंद्रित होती है।
6. क्या सांगला होली में बहुत ज्यादा रंग खेले जाते हैं?
सांगला होली में पारंपरिक गुलाल के साथ होली खेली जाती है और कई बार बर्फ के बीच रंग खेलना इसे हिमालय की सबसे अनोखी होली बनाता है।
7. क्या कामरू होली में रंगों का प्रयोग होता है?
नहीं, कामरू होली में रंगों का प्रयोग बहुत सीमित होता है और यहां फूलों, जल और देव पूजा के माध्यम से होली मनाई जाती है।
8. परिवार और बच्चों के लिए कौन सी होली बेहतर है?
परिवार और बच्चों के लिए कामरू होली बेहतर मानी जाती है क्योंकि इसका वातावरण शांत, सुरक्षित और धार्मिक होता है।
9. सांगला और कामरू होली के समय मौसम कैसा रहता है?
सांगला और कामरू होली के दौरान मौसम ठंडा रहता है, दिन में हल्की धूप और रात में तापमान शून्य के करीब पहुंच सकता है।
10. क्या सांगला होली के दौरान फोटोग्राफी की अनुमति होती है?
सांगला होली में सार्वजनिक स्थानों पर फोटोग्राफी की अनुमति होती है, लेकिन मंदिर और देव पालकी के समय पहले अनुमति लेना जरूरी होता है।
11. क्या कामरू होली के दौरान शराब पीना उचित है?
कामरू होली एक धार्मिक उत्सव है और इस दौरान शराब का सेवन सामाजिक और धार्मिक रूप से उचित नहीं माना जाता।
12. सांगला होली देखने के लिए कितने दिन रुकना चाहिए?
सांगला होली का पूरा अनुभव लेने के लिए कम से कम तीन से चार दिन सांगला घाटी में रुकना सबसे अच्छा माना जाता है।
13. क्या विदेशी पर्यटकों को सांगला या कामरू होली के लिए परमिट चाहिए?
विदेशी पर्यटकों को सांगला और कामरू गांव तक जाने के लिए आमतौर पर परमिट की जरूरत नहीं होती, लेकिन चिटकुल से आगे के क्षेत्रों के लिए Inner Line Permit आवश्यक हो सकता है।
14. सांगला और कामरू होली के दौरान मोबाइल नेटवर्क कैसा रहता है?
सांगला और कामरू दोनों क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क सीमित रहता है और BSNL नेटवर्क सबसे ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।
15. सांगला होली और कामरू होली को खास क्यों माना जाता है?
सांगला होली और कामरू होली इसलिए खास मानी जाती हैं क्योंकि इनमें रंगों के साथ देव परंपरा, लोक नृत्य, हिमालयी संस्कृति और सैकड़ों साल पुरानी आस्थाएं जुड़ी होती हैं।
अंत में
यदि आप रंग, उत्सव और ऊर्जा चाहते हैं तो सांगला होली चुनें। यदि शांति, आस्था और संस्कृति का अनुभव चाहते हैं तो कामरू होली।
2026 में किनौर की होली आपकी यात्रा सूची में जरूर होनी चाहिए।


