खूनी लोहड़ी 2027: Khooni Lohri चंबा का इतिहास और कहानी

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हिमाचल प्रदेश की अनोखी और रोमांचक लोहड़ी – खूनी लोहड़ी को करीब से जानिए।

जहाँ पंजाब में लोहड़ी खुशी और अलाव का पर्व है, वहीं हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में मनाई जाने वाली खूनी लोहड़ी मशालों, परंपरा और इतिहास से जुड़ा एक अनोखा उत्सव है। 2027 में इस पर्व का अनुभव लेने के लिए यह गाइड आपको पूरी और प्रामाणिक जानकारी देती है।

Table of Contents

खूनी लोहड़ी क्या है? इसे “खूनी” क्यों कहा जाता है?

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में लोहड़ी का त्यौहार अपनी अनोखी परंपराओं के कारण बेहद खास और चर्चा का विषय रहा है। यहां लोहड़ी को खूनी लोहड़ी के नाम से जाना जाता है। इस नाम के पीछे सदियों पुरानी सामाजिक संरचना, परंपराएं और ऐतिहासिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं।

इस परंपरा में चंबा की कुल 15 मढ़ियों का विशेष महत्व है। इनमें सुराणा क्षेत्र को पुरुष मढ़ी (राज मढ़ी) का दर्जा प्राप्त है, जबकि इसके आसपास के 13 अन्य क्षेत्रों को महिला मढ़ी कहा जाता है। यह परंपरा हर वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पहले, 13 जनवरी की रात को शुरू होती है।

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Chamba’s Khooni Lohri’s Mashal

इस दिन सुराणा क्षेत्र के लोग लगभग 18 से 20 फीट लंबी विशाल मशाल लेकर अपने क्षेत्र से निकलते हैं। यह मशाल राज मढ़ी का प्रतीक मानी जाती है। परंपरा के अनुसार, इस मशाल को महिला मढ़ियों के क्षेत्रों में गाड़ा जाता है, जो ऐतिहासिक रूप से राज मढ़ी के प्रभुत्व और अधिकार का संकेत माना जाता रहा है।

पुराने समय में इस रस्म के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीव्र संघर्ष और प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती थी। सुराणा क्षेत्र के लोग इसे अपनी जीत और अधिकार के प्रतीक के रूप में देखते थे, जबकि महिला मढ़ियों के लोग इसे अपने क्षेत्र की रक्षा के रूप में मानते थे। सिर पर चोट लगने जैसी घटनाएं आम थीं, लेकिन यह जानकर आश्चर्य होता है कि इतने वर्षों में इस परंपरा के दौरान किसी की मृत्यु का कोई प्रमाण सामने नहीं आया

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मशाल में आग लगाता एक स्थानीय युवक

रियासत काल में यदि मारपीट के दौरान किसी की मृत्यु हो जाती थी, तो उसे सामाजिक मान्यताओं के तहत खून माफ के रूप में स्वीकार कर लिया जाता था। समय के साथ यह परंपरा एक प्रतीकात्मक और सांस्कृतिक आयोजन का रूप ले चुकी है।

आज खूनी लोहड़ी पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से पुलिस और प्रशासन की कड़ी निगरानी में मनाई जाती है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। हालांकि संघर्ष की जगह अब इसका सांस्कृतिक रूप प्रमुख हो गया है, लेकिन सदियों पुराना उत्साह और जोश आज भी वैसा ही बना हुआ है।

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खूनी लोहड़ी उत्सव में दोनों पक्षों में संघर्ष होता हुआ

यह अनोखी परंपरा चंबा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को दर्शाती है। खूनी लोहड़ी न केवल चंबा के लोगों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह इस बात का भी उदाहरण है कि कैसे परंपराएं समय के साथ बदलती हैं, लेकिन उनकी मूल भावना और पहचान बनी रहती है।

खूनी लोहड़ी 2027 कब मनाई जाएगी ?

13 जनवरी 2027 – लोहड़ी की पूर्व संध्या। मुख्य आयोजन रात के समय होता है, जब विशाल मशालें प्रज्वलित की जाती हैं। ठंडी सर्द रात इस उत्सव को और भी रोमांचक बना देती है।

खूनी लोहड़ी के लिए चंबा कैसे पहुँचें?

हवाई मार्ग

नजदीकी एयरपोर्ट: पठानकोट (लगभग 30 किमी)। दिल्ली से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं।

रेल मार्ग

पठानकोट जंक्शन, जहाँ से चंबा के लिए टैक्सी और बसें मिलती हैं।

सड़क मार्ग

  • पठानकोट से चंबा: लगभग 120 किमी (5–6 घंटे)
  • चंडीगढ़ से HRTC बस सेवा उपलब्ध
  • स्वयं वाहन से यात्रा करते समय पहाड़ी सड़कों पर सावधानी रखें

लोहड़ी के दौरान चंबा में कहाँ ठहरें?

  • बजट होटल: ₹700 – ₹2,000 प्रति रात
  • मिड-रेंज होटल: ₹1,700 – ₹2,300 प्रति रात
  • होमस्टे: स्थानीय परिवारों के साथ रहने का अवसर

त्योहार के समय भीड़ अधिक होती है, इसलिए पहले से बुकिंग करना बेहतर रहता है।

पर्यटक खूनी लोहड़ी में सुरक्षित कैसे शामिल हों?

  • निर्धारित पब्लिक Khooni Lohri Viewing Zone से ही आयोजन देखें
  • भारी ऊनी कपड़े पहनें
  • पहचान पत्र साथ रखें
  • मशाल या जुलूस के बहुत नजदीक न जाएँ

खूनी लोहड़ी के मुख्य आकर्षण

  1. विशाल मशाल प्रज्वलन समारोह
  2. मढ़ियों के पारंपरिक जुलूस
  3. ढोल-नगाड़ों के साथ लोक नृत्य
  4. स्थानीय व्यंजन जैसे मादरा, सिड्डू और चना

2027 में खूनी लोहड़ी क्यों देखें?

खूनी लोहड़ी रोमांच, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम है। यह चंबा और भर्मौर की लोक संस्कृति को करीब से समझने का बेहतरीन अवसर देता है और आपकी हिमाचल यात्रा को वास्तव में यादगार बना देता है।

Khooni Lohri को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या खूनी लोहड़ी पर्यटकों (Khooni Lohri for Tourists) के लिए सुरक्षित है?

हाँ, वर्तमान समय में खूनी लोहड़ी पूरी तरह सुरक्षित है। यह आयोजन पुलिस और जिला प्रशासन की कड़ी निगरानी में होता है और पर्यटकों के लिए अलग से पब्लिक व्यूइंग ज़ोन निर्धारित किए जाते हैं।

2. क्या बच्चे खूनी लोहड़ी देखने जा सकते हैं?

हाँ, 10 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे अभिभावकों के साथ इसे देख सकते हैं। हालांकि बहुत छोटे बच्चों को भीड़ और ठंड के कारण दूर रखने की सलाह दी जाती है।

3. जनवरी में चंबा का मौसम कैसा रहता है?

जनवरी में चंबा में कड़ाके की ठंड रहती है। रात का तापमान 0 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, इसलिए भारी ऊनी कपड़े आवश्यक हैं।

4. खूनी लोहड़ी के साथ चंबा में कौन-कौन से प्रमुख दर्शनीय स्थल देखे जा सकते हैं?

खूनी लोहड़ी के दौरान आप लक्ष्मी नारायण मंदिर, अखंड चंडी पैलेस, रंग महल, भूरी सिंह संग्रहालय और चमेरा झील जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों की यात्रा कर सकते हैं।

5. चंबा के प्रसिद्ध मंदिर कौन से हैं?

चंबा के प्रमुख मंदिरों में लक्ष्मी नारायण मंदिर समूह, चंपावती मंदिर, चामुंडा देवी मंदिर और हरिराय मंदिर शामिल हैं, जो धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

6. क्या खूनी लोहड़ी के बाद भरमौर जाना सही रहेगा?

हाँ, खूनी लोहड़ी के बाद भरमौर जाना एक बेहतरीन विकल्प है। यह चंबा जिले का शांत, कम भीड़ वाला और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हिल स्टेशन है।

7. भरमौर में कौन-कौन से प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं?

भरमौर में 84 मंदिर परिसर (चौरासी मंदिर), भर्माणी माता मंदिर, कुगती गांव, चोबिया गाँव और आसपास की हिमालयी घाटियाँ प्रमुख आकर्षण हैं।

8. चंबा और भरमौर घूमने के लिए कितने दिन का प्लान पर्याप्त है?

चंबा और खूनी लोहड़ी के लिए 2–3 दिन पर्याप्त होते हैं। यदि आप भरमौर को भी शामिल करते हैं, तो 4–5 दिन का यात्रा प्लान बेहतर रहेगा।

9. चंबा के पास कौन-कौन से ऑफबीट और प्राकृतिक पर्यटन स्थल हैं? (Chamba Offbeat Tourist Places)

चंबा के आसपास भरमौर, खजियार, कुगती गांव, चमेरा झील और मणिमहेश मार्ग जैसे ऑफबीट और प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं।

10. क्या खूनी लोहड़ी के दौरान होटल और होमस्टे आसानी से मिल जाते हैं?

त्योहार के समय चंबा में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए होटल या होमस्टे की पहले से बुकिंग करना बेहतर रहता है।

यह हिमाचल (HIMPRADESH) के KHOONI LOHRI से जुड़े इस ट्रैवल ब्लॉग की पूरी जानकारी थी ।अगर आपके पास इस सूची में जोड़ने के लिए कोई और सुझाव हों, तो कृपया नीचे दिए गए कमेंट सेक्शन में अपना विचार ज़रूर साझा करें।

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