हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित लिप्पा गांव अपनी प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर वर्ष दिसंबर के अंतिम दिनों में लोसर पर्व के रूप में नया वर्ष मनाया जाता है। लिप्पा लोसर तिब्बती-बौद्ध परंपराओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक त्यौहार है, जो सामूहिक एकता, धार्मिक आस्था और लोकसंस्कृति को दर्शाता है।
Lippa Losar कब मनाया जाता है ?
लिप्पा लोसर किन्नौर जिले के पूह क्षेत्र में स्थित लिप्पा गांव में मनाया जाने वाला पारंपरिक नववर्ष उत्सव है। यह पर्व चंद्र-सौर पंचांग के अनुसार दिसंबर के अंत या जनवरी की शुरुआत में आता है। कड़ाके की ठंड के बावजूद गांव के लोग पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस त्योहार को मनाते हैं।

लोसर का अर्थ होता है “नया वर्ष”। किन्नौर क्षेत्र में यह पर्व अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और शांति की कामना के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर बाहर रहने वाले लोग भी अपने गांव लौटते हैं, जिससे पारिवारिक और सामाजिक संबंध और मजबूत होते हैं।
लिप्पा गांव (Lippa) का भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व
Lippa Village लगभग 2500 मीटर की ऊंचाई पर सतलुज नदी के किनारे बसा हुआ है। चारों ओर बर्फ से ढकी पहाड़ियां, सेब के बागान और शांत वातावरण इस गांव को विशेष बनाते हैं। यह क्षेत्र बौद्ध और हिंदू संस्कृति के संगम का सुंदर उदाहरण है।
यहां के लोग नारायण नाग और अन्य स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। Lippa Losar के अवसर पर लोग स्थानीय देवी-देवताओं के साथ नृत्य भी करते हैं । गांव की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर आधारित है। सेब, चिलगोजा और काला जीरा यहां की प्रमुख फसलें हैं और लोसर पर्व इन्हीं फसलों की अच्छी पैदावार की कामना के साथ मनाया जाता है।
LOSAR (लोसर) उत्सव की परंपराएं और रीति-रिवाज
Losar (लोसर) से पहले घरों की साफ-सफाई की जाती है, जिसे पुराने वर्ष की नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जैसे ढिंडा, थुकपा, खंबीर और मक्खन वाली नमकीन चाय।
उत्सव के दौरान पुरुष ढोल-नगाड़ों के साथ नृत्य करते हैं, जबकि महिलाएं रंग-बिरंगे पारंपरिक वस्त्रों में लोकनृत्य प्रस्तुत करती हैं। आमतौर पर यह उत्सव तीन दिनों तक चलता है, जिसमें पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक भोज शामिल होते हैं।
लिप्पा लोसर 2025 की खास झलक
Lippa Losar 2025 का आयोजन अत्यंत उत्साहपूर्ण रहा। कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और पारंपरिक गीत-संगीत व नृत्यों के साथ नववर्ष का स्वागत किया।
इस अवसर पर प्रसिद्ध लोकगायक बिज्जू भाई (Singer Bijju Bhai) ने अपना फेमस ट्रैक “o partner o partner motta e kyu” गाकर सभी दर्शकों का मंत्रमुग्ध कर दिया।

लोसर का धार्मिक और सामाजिक महत्व
लिप्पा लोसर बौद्ध परंपराओं से जुड़ा हुआ है, लेकिन किन्नौर में यह हिंदू रीति-रिवाजों के साथ मिलकर मनाया जाता है। यह पर्व सुख, शांति, समृद्धि और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
आज के समय में यह उत्सव युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करता है। महिलाओं की भागीदारी इसमें विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है, जो पूजा और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
How to reach Lippa Village? पर्यटकों के लिए यात्रा जानकारी
Lippa Losar kaise pahuche? लिप्पा गांव पहुंचने के लिए शिमला से रिकांगपिओ तक सड़क मार्ग उपलब्ध है। वहां से पूह होते हुए लिप्पा जाया जा सकता है।
- रहने के लिए स्थानीय होमस्टे उपलब्ध हैं
- गर्म कपड़े और आवश्यक दवाइयां साथ रखें
- स्थानीय परंपराओं और संस्कृति का सम्मान करें

Lippa Losar Local Food : लिप्पा लोसर के पारंपरिक व्यंजन
लोसर के दौरान बनाए जाने वाले व्यंजन ठंडे मौसम के लिए पौष्टिक होते हैं। जौ और मक्खन से बने व्यंजन शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इस पर्व में सादगी को महत्व दिया जाता है और नशे से परहेज किया जाता है।
आधुनिक चुनौतियां और संस्कृति संरक्षण
जलवायु परिवर्तन और आधुनिक जीवनशैली के कारण ऐसी परंपराओं के सामने कई चुनौतियां हैं। फिर भी स्थानीय लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
डिजिटल माध्यमों से अब लिप्पा लोसर को नई पहचान मिल रही है। युवा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर जमकर रील बना रहे हैं, जो वायरल भी हो रही हैं।
अंत में (December Lippa Losar)
लिप्पा लोसर हिमालय की समृद्ध और जीवंत संस्कृति का प्रतीक है। यह उत्सव परंपरा, आस्था और सामुदायिक जीवन को एक साथ जोड़ता है।
यदि आप हिमाचल प्रदेश की असली सांस्कृतिक झलक देखना चाहते हैं, तो December में Lippa Losar का अनुभव अवश्य करें। किन्नौर में और भी त्यौहार पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं जैसे की Raulane Festival (रोलाने पर्व)।
LIPPA LOSAR FAQs
1. Lippa Losar festival कौन से राज्य में मनाया जाता है ?
लिप्पा लोसर त्यौहार हिमाचल प्रदेश (हिमप्रदेश) के किन्नौर जिले में मनाया जाता है ।
2. Lippa गाँव की sea level height कितनी है ?
लिप्पा village की समुंद्र तल से 2,438 मीटर (8000 feet approx.) की ऊंचाई पर स्थित है ।
3. How to reach Lippa Village ?
- By Air – हवाई मार्ग से आप चंडीगढ़ या शिमला एयरपोर्ट तक फ्लाइट ले सकते हैं। वहां से टैक्सी या बस द्वारा रेकांग पिओ पहुँचा जा सकता है।
- By Rail – रेल मार्ग से पहले कालका होते हुए शिमला पहुँचना होगा। इसके बाद सड़क मार्ग से रेकांग पिओ जाना होगा।
- By road – सड़क मार्ग से शिमला से रेकांग पिओ के लिए एचआरटीसी बसें और टैक्सी उपलब्ध हैं।
एक बार Reckong Peo पहुँचने के बाद आप Cab या टैक्सी बुक कर सकते हैं । आप ड्राइवर से Lippa village जाने को बोल सकते हैं । साथ में Lippa-Asrang Sanctuary (near Moorang) घूमना ना भूलें ।
4. लिप्पा लोसर दोनों एक साथ क्यों लिखे जाते हैं ?
लिप्पा–लोसर” (Lippa–Losar) दोनों नाम अक्सर एक साथ इसलिए लिखे जाते हैं क्योंकि दोनों एक-दूसरे के बहुत नज़दीक बसे हुए गाँव हैं।
5. LIPA- LOSAR – त्यौहार कितने दिन मनाया जाता है ?
LIPA–LOSAR त्यौहार आमतौर पर december end में 3 दिनों तक मनाया जाता है पर आजकल यह किन्नौर क्षेत्र का नववर्ष (Tibetan New Year) 7 दिनों से लेकर 15 दिनों तक मनाया जाता है ।
That’s all in this travel blog on best time to visit in Lippa Village on Lippa Losar Festival . If you have more suggestions to add in the list, please leave a comment below.
यह हिमाचल कम्पास पर LIPPA LOSAR NEW YEAR FESTIVAL से जुड़े इस ट्रैवल ब्लॉग की पूरी जानकारी थी।
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