- Manimahesh 2025 परिचय: हिमालय का पावन शिवधाम
मणिमहेश कैलाश हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले की भरमौर तहसील में स्थित एक पवित्र तीर्थ स्थल है। 5,653 मीटर ऊँचा यह पर्वत और इसके आधार पर स्थित मणिमहेश झील (4,080 मीटर) हिंदुओं के लिए तिब्बत स्थित मानसरोवर झील के बाद दूसरा सबसे पवित्र स्थान माना जाता है । यहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन ट्रेकिंग के बाद “मणि” के दर्शन और झील में पवित्र स्नान के लिए आते हैं, जिसका आध्यात्मिक और प्राकृतिक महत्व अद्वितीय है।

धार्मिक महत्व एवं पौराणिक कथाएँ
- शिव-पार्वती का निवास स्थल:
- मान्यता है कि भगवान शिव ने देवी पार्वती के साथ रहने के लिए इस पर्वत की रचना की थी। चोटी पर शिवलिंग के आकार की एक चट्टान है, जिसे शिव का प्रत्यक्ष रूप माना जाता है ।
- झील के निकट स्थित हिमाच्छादित मैदान को “शिव का चौगान” कहा जाता है, जहाँ शिव-पार्वती क्रीड़ा करते हैं ।
- मणि दर्शन की मान्यता:
- जन्माष्टमी और राधाष्टमी के दिन चौथे पहर (रात्रि 3-4 बजे) चंद्रमा की रोशनी पर्वत शिखर पर पड़ने से एक दिव्य ज्योति दिखाई देती है, जिसे “मणि” कहते हैं। भक्तों का विश्वास है कि यह स्वयं शिव का प्रकाश रूप है ।
- पंच कैलाश में स्थान:
- यह पंच कैलाशों (मुख्य कैलाश, आदि कैलाश, शिखर कैलाश, किन्नौर कैलाश और मणिमहेश कैलाश) में पाँचवें स्थान पर आता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है ।
- अपूर्व पर्वत की कथा:
- एक किंवदंती के अनुसार, एक गडरिये ने अपनी भेड़ों के साथ पर्वत चढ़ने का प्रयास किया, लेकिन वह चोटी तक पहुँचने से पहले पत्थर में बदल गया। आज भी छोटे पत्थरों को उसी गडरिये और उसकी भेड़ों का रूप माना जाता है ।
यात्रा विवरण एवं मार्ग
आदर्श समय एवं आयोजन
- Manimahesh 2025 मुख्य यात्रा अवधि: यह जन्माष्टमी से राधाष्टमी तक (अगस्त-सितंबर) चलती है। 2025 में छोटा स्नान (छोटा न्हौण) 16 अगस्त और बड़ा स्नान (शाही स्नान) 31 अगस्त को आयोजित होगा ।
- ट्रेकिंग अवधि: मई से अक्टूबर तक (बर्फ रहित मौसम), परंतु सरकारी यात्रा केवल अगस्त-सितंबर में ।
यात्रा मार्ग के प्रमुख चरण
चरणदूरी/समयविशेषताएँपठानकोट से भरमौर 165 किमी (6 घंटे) चम्बा से गुजरते हुए, बस या जीप द्वारा भरमौर से हड़सर 13 किमी (जीप) यात्रा का अंतिम मोटर योग्य बिंदु हड़सर से धनचो 7 किमी ट्रेक घने जंगल, झरने और घाटियाँ धनचो से मणिमहेश 7 किमी ट्रेक गौरी कुंड (महिलाओं के लिए पवित्र), खड़ी चढ़ाई और 14,500 फीट की ऊँचाई
Manimahesh 2025 प्रमुख पड़ाव एवं दर्शनीय स्थल
- चौरासी मंदिर, भरमौर: 84 छोटे मंदिरों का समूह, जिनका निर्माण राजा साहिल वर्मन ने 84 योगियों के आशीर्वाद से प्राप्त 10 पुत्रों की स्मृति में करवाया ।
- ब्रह्माणी मंदिर: मान्यता है कि मणिमहेश यात्रा से पहले यहाँ स्नान अनिवार्य है, अन्यथा शिव यात्रा स्वीकार नहीं करते ।
- गौरी कुंड: मणिमहेश झील से 1 किमी पहले स्थित, जहाँ सिर्फ महिलाएँ स्नान कर सकती हैं ।
- झील परिक्रमा: तीन बार परिक्रमा करने के बाद संगमरमर के शिवलिंग की पूजा की जाती है ।
Manimahesh 2025 यात्रा की व्यावहारिक तैयारी
आवश्यक सामग्री
- पहनावा: वॉटरप्रूफ जैकेट, थर्मल, ट्रेकिंग शू, दस्ताने और टोपी ।
- अन्य सामान: सनस्क्रीन, फर्स्ट एड किट, टॉर्च, पानी की बोतल, ऑक्सीजन सिलिंडर (ऊँचाई के लिए) ।

⚠️ सुरक्षा सुझाव
- शारीरिक तैयारी: यात्रा से पहले कार्डियो व्यायाम और छोटे ट्रेक्स द्वारा सहनशक्ति बढ़ाएँ।
- ऊँचाई की समस्या: धनचो (9,500 फीट) और मणिमहेश (13,500 फीट) पर AMS (एक्यूट माउंटेन सिकनेस) से बचने के लिए 1-2 दिन अक्लाइमेटाइजेशन के लिए रुकें ।
- मौसम की चुनौती: Manimahesh 2025 अगस्त में भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा। हाल ही में 2023 यात्रा में खराब मौसम के कारण यात्रा कई बार रोकी गई ।
आवास एवं लॉजिस्टिक्स
- भरमौर, धनचो, सुन्दराशि, गौरीकुंड और शिवकुंड में कैंप सुविधाएँ उपलब्ध हैं । आप वहाँ सिर्फ़ एक 100 रुपये में , विश्राम कर सकते हैं । यात्रा में जगह जगह लंगर समितियों के द्वारा भोजन और ठहरने की निशुल्क सुविधा भी प्रदान की जाती है । साथ में सरकार द्वारा मेडिकल कैम्प की सुविधा भी उपलब्ध रहती है।
- हेलीकॉप्टर सेवा: शारीरिक रूप से कमजोर यात्री नीचे दी गई सरकारी वेबसाइट के माध्यम से हेलीकॉप्टर बुक कर सकते हैं ।
- https://www-manimaheshyatra-hp-gov-in
सांस्कृतिक एवं सामुदायिक पहलू
- गद्दी जनजाति की भूमिका: स्थानीय गद्दी समुदाय के लोग यात्रा से पहले भेड़ों के साथ पहाड़ों पर जाकर रास्ते से अवरोध हटाते हैं, जिससे यात्रा सुगम हो ।
- सामूहिक आस्था का अनुभव: 2024 में 6 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिनमें से 1 लाख ने बड़े शाही स्नान के दिन झील में डुबकी लगाई ।
- स्थानीय विश्वास: स्थानीय लोग कैलाश पर्वत को अपना रक्षक मानते हैं और बर्फबारी व हिमस्खलन को शिव की इच्छा से जोड़ते हैं । चंबा के मशहूर मिंजर मेले के बाद शिवभक्त मणिमहेश की पावन यात्रा करते हैं ।
शुद्धि का संकल्प
मणिमहेश कैलाश यात्रा केवल एक ट्रेक नहीं, बल्कि भक्ति, साहस और प्रकृति के प्रति समर्पण का संगम है। जहाँ एक ओर चढ़ाई के दौरान शारीरिक चुनौतियाँ आती हैं, वहीं मणि के दर्शन और झील के पवित्र जल में स्नान का अनुभव समस्त कष्टों को विस्मृत कर देता है। यह यात्रा मनुष्य को अपनी सीमाओं का अतिक्रमण कर ईश्वरीय अनुग्रह की अनुभूति कराती है। जैसा कि स्थानीय कहावत है: “जो सच्चे मन से आता है, उसे मणि के दर्शन अवश्य होते हैं” ।
🙏 भक्ति और साहस का संगम: यह यात्रा उन्हीं के लिए सफल होती है जो शिव के प्रति अटूट श्रद्धा रखते हैं और प्रकृति की चुनौतियों को स्वीकार करने का साहस रखते हैं।
हर हर महादेव 🙏🙏


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